Bank of Baroda

 

बैंक ऑफ बड़ौदा का कर्ज हुआ सस्‍ता, जानिए कितनी दी राहत

बैंक की नई दरें 15 मार्च 2021 से प्रभावी हो गई हैं.

एक नज़र

पिछले हफ्ते बीओबी ने सभी अवधि के लिए अपने मार्जिनल कॉस्‍ट ऑफ फंड्स बेस्‍ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) को यथावत रखा था.

मुंबई : सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ने रेपो रेट से लिंक्‍ड ब्याज दर में कटौती की है. देश के तीसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक ने इन दरों को 0.10 फीसदी घटाया है. इस कटौती के बाद रेपो लिंक्‍ड लेंडिंग रेट (आरएलएलआर) 6.85 फीसदी से घटकर 6.75 फीसदी पर आ गए हैं. नई दरें 15 मार्च 2021 से प्रभावी हो गई हैं. बैंक के इस कदम के बाद उसके सभी रिटेल लोन सस्‍ते होंगे. इनमें होम, एजुकेशन, पर्सनल और कार लोन इत्‍यादि शामिल हैं. ग्राहकों को इससे फायदा होगा.

बैंक ने बताया है कि इस संशोधन के बाद होम लोन पर ब्याज दर 6.75 फीसदी और कार लोन पर 7 फीसदी हो गई है. वहीं एजुकेशन लोन पर ब्याज 6.75 फीसदी होगा.

ADVERTISEMENT

इसे भी पढ़ें : कैसा है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का अब तक का रिपोर्ट कार्ड?

बीओबी के महाप्रबंधक हर्षद कुमार सोलंकी ने कहा, ''रेपो दर से संबद्ध ब्याज में कटौती से हमारा कर्ज ग्राहकों के लिए और सस्ता हो गया है. हमें उम्मीद है कि डिजिटल प्रक्रिया को लेकर हम जो प्रयास कर रहे हैं, उससे ग्राहक काफी प्रतिस्पर्धी दर पर तेजी और सुगमता से कर्ज ले सकेंगे.''
ADVERTISEMENT

इसे भी पढ़ें : पोस्ट ऑफिस में पीपीएफ, बचत खाता है? जानें जमा और निकासी के नियमों में क्‍या हुआ है बदलाव

पिछले हफ्ते बीओबी ने सभी अवधि के लिए अपने मार्जिनल कॉस्‍ट ऑफ फंड्स बेस्‍ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) को यथावत रखा था. इसका मतलब यह है कि बैंक के ताजा कदम का फायदा उन्‍हीं ग्राहकों को मिलेगा जिनका लोन एक्‍टर्नल बेंचमार्क यानी रेपो रेट से जुड़ा है.

इसके पहले भारतीय स्‍टेट बैंक (एसबीआई), आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी होम लोन पर ब्‍याज दर घटाने का एलान कर चुके हैं.

पैसे कमाने, बचाने और बढ़ाने के साथ निवेश के मौकों के बारे में जानकारी पाने के लिए हमारे फेसबुक पेज पर जाएं. फेसबुक पेज पर जाने के लिए यहां क्‍ल‍िक करें
ADVERTISEMENT

READ MORE NEWS ON

BANK OF BARODA NEWSबैंक ऑफ बड़ौदाएमसीएलआररेपो रेटआरएलएलआरकर्ज
अगली खबर

कैसा है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का अब तक का रिपोर्ट कार्ड?

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत 2015 में हुई थी.

एक नज़र

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत तीन प्रकार के कर्ज दिए जाते हैं: शिशु, किशोर और तरुण. शिशु के अंतर्गत 50,000 रुपये तक, किशोर के तहत 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक और तरुण के अंतर्गत 5 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक कर्ज देने का प्रावधान है.

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत 2015 में हुई थी. इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी. इस योजना के तहत लाभार्थियों को गारंटी मुक्त कर्ज देने की व्यवस्था की गई है. पीएम मुद्रा योजना के तहत तीन प्रकार के कर्ज दिए जाते हैं: शिशु, किशोर और तरुण. शिशु के अंतर्गत 50,000 रुपये तक, किशोर के तहत 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक और तरुण के अंतर्गत 5 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक कर्ज देने का प्रावधान है.

इस योजना के जरिये सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग इकाइयों को माइक्रोफाइनेंस के रूप में वित्तीय उपलब्धता को सुनिश्चित करते हुए आर्थिक विकास और रोजगार बढ़ाने की परिकल्पना की गई थी. साथ ही इस योजना के अंतर्गत कमजोर वर्ग के लोग भी कर्ज ले सकते हैं. उदाहरण के लिए छोटे दुकानदार, फल-सब्जी विक्रेता, टैक्सी चलाने वाले, मरम्मत की दुकान चलाने वाले इत्यादि.

ADVERTISEMENT

क्‍या कहते हैं आंकड़े?
वर्ष 2015-16 के दौरान इस योजना के तहत कुल 3,48,80,924 मुद्रा कर्ज आवंटित किए गए और इस मद में कुल 1,37,449.27 करोड़ रुपये आवंटित हुए. इसमें से कुल 1,32,954.73 करोड़ रुपये जारी किए गए.

ADVERTISEMENT
वर्ष 2016-17 के दौरान कुल 3,97,01,047 मुद्रा कर्ज आवंटित किए गए और इस मद में कुल 1,80,528.54 करोड़ रुपये आवंटित हुए. इसमें से कुल 1,75,312.73 करोड़ रुपये जारी किए गए.

इसे भी पढ़ें : पोस्ट ऑफिस में पीपीएफ, बचत खाता है? जानें जमा और निकासी के नियमों में क्‍या हुआ है बदलाव

वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के अंतर्गत कुल 4,81,30,593 मुद्रा कर्ज आवंटित किए गए और इस मद में कुल 2,53,677.10 करोड़ रुपये आवंटित हुए. इसमें से कुल 2,46,437.40 करोड़ रुपये जारी किए गए.

वर्ष 2018-19 के दौरान इस योजना के अंतर्गत कुल 5,98,70,318 मुद्रा कर्ज आवंटित किए गए और इस मद में कुल 3,21,722.79 करोड़ रुपये आवंटित हुए. इसमें से कुल 3,11,811.38 करोड़ रुपये जारी किए गए.

ADVERTISEMENT
वर्ष 2019-20 के दौरान इस योजना के अंतर्गत कुल 6,22,47,606 मुद्रा कर्ज आवंटित किए गए और इस मद में कुल 3,37,495.53 करोड़ रुपये आवंटित हुए. इसमें से कुल 3,29,715.03 करोड़ रुपये जारी किए गए.

वर्ष 2020-21 के दौरान इस योजना के अंतर्गत कुल 3,88,82, 992 मुद्रा कर्ज आवंटित किए गए और इस मद में कुल 2,47,662.88 करोड़ रुपये आवंटित किए गए. इसमें से कुल 2,33,274.67 करोड़ रुपये जारी किए गए.

कितनी मिली है सफलता?
अब जब हम इन आंकड़ों को देखते हैं तो पाते हैं कि यह योजना एक बहुत बड़ी आबादी को प्रभावित करती दिख रही है. लेकिन, इस योजना की सफलता इस पैमाने पर तय होगी कि यह कितना रोजगार सृजन करने में सफल रही है? हाल ही में श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत आने वाले श्रम ब्यूरो ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के संदर्भ में एक सर्वेक्षण किया था. यह सर्वेक्षण अप्रैल 2018 से नवंबर 2018 के मध्य किया गया था. इस सर्वेक्षण के परिणाम मुद्रा योजना के बुनियादी लक्ष्य पर सवाल करते दिखते हैं.

इस सर्वेक्षण में भाग लेने वाले हर 5 में से महज एक ही लाभार्थी ने मुद्रा कर्ज का उपयोग कर किसी नए व्यवसाय को आरंभ करने का कार्य किया है. शेष सभी लाभार्थियों ने मुद्रा कर्ज का इस्तेमाल अपने व्यापार की विस्तार के संदर्भ में किया है.

इसे भी पढ़ें : दो दिन बैंकों की हड़ताल, परेशान न हों, इन उपायों से नहीं रुकेगा काम

मुद्रा योजना के अंतर्गत मंजूर किए गए कर्ज की राशि का औसत इस योजना के लक्ष्य पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है. यह सर्वेक्षण रिपोर्ट बताती है कि मुद्रा की तीनों श्रेणियों में दिए गए कुल 5.71 लाख करोड़ रुपये का औसत महज 46,536 रुपये का है. इस तथ्य से सवाल उठते हैं कि कि क्या महज 46,000 रुपये में कोई नई औद्योगिक इकाई का निर्माण या फिर किसी जारी औद्योगिक इकाई का विस्तार किया जा सकता है? और इस सवाल को मजबूती इसी सर्वेक्षण का एक आंकड़ा देता है. मुद्रा योजना के तहत क्षेत्रवार रोजगार सृजन के आंकड़ों पर गौर करने पर यह ज्ञात होता है कि विनिर्माण क्षेत्र में यह महज 11.7 फीसदी ही रोजगार सृजन करने में सफल रहा है.

क्‍या निष्‍कर्ष निकाल सकते हैं?
हम इस निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं कि मुद्रा योजना के अंतर्गत दिए गए हर कर्ज को एक नए रोजगार के रूप में नहीं देखा जा सकता है. अगर ऐसा किया जाएगा तब तो देश में बेरोजगारी ही खत्म हो जाएगी क्योंकि मुद्रा योजना के अंतर्गत पिछले 6 सालों में 28 करोड़ लाभार्थियों को शामिल किया गया है.

इस हिसाब से देखें तो हर वर्ष 4.6 करोड़ रोजगार का सृजन तो महज मुद्रा योजना के अंतर्गत ही किया जा चुका है. लेकिन यह सच नहीं है क्योंकि बेरोजगारी से संबंधित आंकड़ों ने बताया है कि देश में वर्तमान बेरोजगारी दर पिछले 5 दशक में सबसे ज्‍यादा है और यह कोविड-19 की आर्थिक तबाही के पहले ही आ चुकी थी.

इसे भी पढ़ें : एडलवाइज म्‍यूचुअल फंड ने लॉन्च की नई स्कीम, जानिए किसे करना चाहिए निवेश

क्‍या कर सकती है सरकार?
सरकार को मुद्रा योजना की सफलता और असफलता के पैमानों को तय करने के लिए एक समिति का निर्माण करते हुए जांच करानी चाहिए. मुद्रा योजना के अंतर्गत जिन कार्यों को दिया गया उनकी वैधानिकता की भी जांच होनी चाहिए. साथ ही एक संभावित खतरे के लिए भी तैयार रहना चाहिए. यह संभावित खतरा मुद्रा योजना के अंतर्गत दिए गए कर्ज के एनपीए में बदलने का होगा. अभी कोई ठोस जानकारी तो उपलब्ध नहीं है. लेकिन, मुद्रा योजना के अंतर्गत दिए गए कर्ज का एक बड़ा हिस्सा एनपीए के रूप में बदलता दिख रहा है.

वर्ष 2019 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया था कि 31 मार्च 2018 तक मुद्रा योजना के तहत सार्वजनिक बैंकों का एनपीए 7,277.31 करोड़ रुपये था. आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार मुद्रा से प्राप्त आकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2019 तक कुल 16,481.45 करोड़ रुपये के मुद्रा लोन एनपीए हो चुके थे.

YouTube channel
Mirza network
Please subscribe me

Comments

Popular posts from this blog